उत्तराखंड

किसका पहाड़

पहाड़ भी महज एक कोना ही तो है इस संसार का। उसे भी दुनिया वैसी ही दिखाई देती है जैसी बाकि सब को। इसीलिए पहाड़ भी वक्त जाया करता है इस संवाद में कि यह जमीन किसकी है, यह संस्कृति किसकी है…

फ्यूंली

कहते हैं की हर दस किलोमीटर में भाषा का स्वरुप बदल जाता है। मुहावरे और लोकोक्तियाँ बदलने लगती हैं। कुछ ऐसा ही लोक कथाओं के साथ भी होता है जो जगह और समय के अनुसार अपने को नए रंग में ढाल लेतीं हैं। ऐसी ही एक अद्भुत कथा है फ्यूंली की।