लघु कथाएँ

लघु कथाओं का अर्थ अत्यंत छोटी कहानियाँ नहीं हैं। कहानी कम शब्दों में कही गईं हैं पर किसी भी मायने में छोटी नहीं है। अल्प शब्दों में बहुत कुछ कहने की कोशिश है ये लघु कथाएँ।

चुनाव, विक्रम और बेताल

बेताल को लाने के लिए एक बार फिर विक्रम वापस चल पड़ा। बेताल को लक्ष्य तक पहुँचाने से ज्यादा विक्रम को उस कहानी का इंतज़ार था जिसमें चुनाव के लिए कोई तीसरा विकल्प भी हो।

फैमिली ट्री

स्कूल बस में हर रोज किसी न किसी अभिभावक की बस ड्यूटी लगती है। दिन की ड्यूटी अमूमन शिक्षक निभाते हैं क्योंकि अधिकाँश माँ बाप नौकरी पेशा हैं। हर महीने के पहले सोमवार को सुधीर की बारी आती है।

सौंदर्यबोध

सुंदर पहाड़ी रास्तों पर चलते हुए अक्सर तन थक जाता है पर मन नहीं। इसलिए जैसे ही मुझे सुन्दर बुरांश के फूल दिखे मैं अपनी सारी थकान भूल सा गया और अपने बालकपन में लगभग फुदकते हुए जोर से बोल बैठा, “अहा, कितना सुन्दर फूल है! “

नामकरण

दो छोटे खेतों, एक भैंस, दो गाय और छह बकरियों के कारण गाँव शहर न जा सका। और गाँव तथा पास के पहाड़ी शहर में नदारत स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते शहर गाँव नहीं आ पाया। इसलिए तय हुआ की शिवराज, अपनी पत्नी सावित्री, और 20 दिन के बच्चे के साथ गाँव आएगा ताकि 21वें दिन नामकरण हो सके।

लोकतंत्र का ठेका

आज से जात बिरादरी उतना मायने नहीं रखेगी क्योंकि ग्राम और जिला पंचायत के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। पर यह बात शराबी नहीं जानते इसलिए अभी भी अँधेरे को, पेड़ों को और हवा को गालियाँ देते हुए घूम रहे हैं। इनमें से कई, कई दिनों से नशे में है। एक निजी निर्णय का इतना लाभ कभी कभार ही मिलता है।

हैरी का ईष्ट देवता

हैरी की एक छोटी सी दुकान है चौराहे पर। वो पैदा तो हरिया हुआ था पर जब परिवार ईसाई बना तो उसका नाम हरिया से हैरी हो गया। पिताजी हरदा हेनरीदा हो गए पर ईजा ईजा ही रही।

अछूत पंडित

दिन भर, बेखौफ, यहाँ वहाँ की खाक छान कर पंडितजी शाम को जबरदस्त पूजा अर्चना करते थे। बावजूद उसके पण्डितजी को कोविड हो गया। बात बिगड़ी, पर उतनी नहीं की अस्पताल जाना पड़े।

महामारी में इश्क

जब चारों दिशाओं में हाहाकार मचा हो, हर तरफ से दुख की ही खबरें आ रहीं हो तब व्याकुल मन उस अंधकार में रोशनी तलाशने निकलता है। क्योंकि रोशनी के बिना अंधकार संभव ही नहीं। एक ऐसी ही रोशनी की लघु कथा।